Hindurashtra He Akhand Amuche (Marathi)


Hindurashtra He Akhand Amuche (Marathi)

हिन्दुराष्ट्र हे अखंड अमुचे अखंड जीवन धार

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हिन्दुराष्ट्र हे अखंड अमुचे अखंड जीवन धार
भिन्न प्रांत आचार भिन्न जरि एकचि परि संस्कार ॥ध्रु॥

हिंदुभूमी ही पुण्य पुरातन कणकण येथिल मंगल पावन
हिंदुहृदयीचे चिर संवेदन होय स्वयंसाकार ॥१॥

इथेच वेदांचे अमृतरव मर्यादापुरुषोत्तम राघव
श्रीकृष्णाचे गीतावैभव गांडिव करि टंकार ॥२॥

मानबिंदुचे करण्या रक्षण अंतरिच्या त्या स्फुल्लिंगातुन
संघशक्तिचे घडवू दर्शन छेदुन घन अंधार ॥३॥

याच व्रतास्तव जीवन अमुचे दिव्य कार्य अविरत करण्याचे
मूर्त रूप हे नवराष्ट्राचे घडविल साक्षात्कार ॥४॥

Hindurashtra He Akhand Amuche (Marathi)
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