Desh Dharma An Sanskruticha (Marathi)


Desh Dharma An Sanskruticha (Marathi)

देश धर्म अनं संस्कृतिचा

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देश धर्म अनं संस्कृतिचा
आपण सारे राखू मान
जीवन-पुष्प समर्पण करुनी
राष्ट्राचा करु पुनरुद्धार॥

लोकसागरी मिसळुनी जाता जनगंगांन्ना एक करु
हिन्दुत्वाच्या संदेशाने अखिल विश्व एकात्म करु
कण कण भारु चैतन्याने चंदनही फुलवी अंगार ॥१॥

समाजातले दोष निपटुनी समरसतेचा भरुया भाव
ध्येयसाधना संघटनेची त्यासाठी ही अविरत धाव
घेउ प्रतिज्ञा आपण सारे राष्ट्रशक्तिचा हो आधार ॥२॥

लोकमनावर संस्काराने नवमानव जगती घडवू
जीवनमूल्यांच्या वर्षावे स्वर्ग धरेवर उभा करू
हृदयमंदिरी ध्येय देव हो यातच जीवन हो साकार ॥३॥
Desh Dharma An Sanskruticha (Marathi)
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