Yugayugatil He Sinhasan (Marathi)


Yugayugatil He Sinhasan (Marathi)

युगायुगातिल हे सिंहासन

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युगायुगातिल हे सिंहासन आज पुन्हा जाहले सचेतन ॥

परंपरेचे अमुच्या उज्वल संस्कृतिचे हे प्रतीक मंगल
भारतीय हृदयातिल झाले स्वप्न आज साकार चिरंतन ॥१॥

स्तब्ध जाहली जनता सारी सत्तेला मद चढला भारी
लोकपाल म्हणुनीच जन्मला विष्णु इथे घेई सुदर्शन ॥२॥

अनुशासित सरभाव करोनी चेतविला राष्ट्रधर्म वन्ही
प्रखर तपाचरणातुन झाला प्रकट आज का मंगल शुभदिन ॥३॥

झाले दण्डित दुष्ट अधम खल उदण्ड झाले संध्येस्तव जल
धर्माधिष्टित राज्याचे हे आज खरोखर पुनरुथ्थान ॥४॥

सिंहासन हे विक्रमशालि चिरगौरव युत वैभवशालि
होण्यास्तव हे अपुले येथे चला करा सर्वस्व समर्पण ॥५॥

Yugayugatil He Sinhasan (Marathi)
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