Nirbhayatene Chalat Rahu (Marathi)


Nirbhayatene Chalat Rahu (Marathi)

निर्भयतेने चालत राहू

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

निर्भयतेने चालत राहू मार्ग भला आपुला
अनुकुल प्रतिकुल काळाचा हा खेळ असे चालला ॥ध्रु॥

वादळ उठता लोट धुळीचे आकाशी उडती
मेघांचे अवडंबर येता दिशा मंद होती
परि सूर्याने भ्रणाचा कधि मार्ग नसे बदलला ॥१॥

ग्रीष्म ऋतूच्या झळा लागता निर्झर जरि आटती
शिशिराच्या थंडीने पाने वृक्षांची गळती
कालचक्र परि पुन्हा फिरुनि ये सृष्टी बहराला ॥२॥

काळ सुखाचा कधी जीवनी दुख कधी उपजे
उजेड पसरे तसाच केव्हा अंधारहि माजे
दिन रात्रीचा नित्य असे हा पाठलाग चालला ॥३॥

कार्य जरी हे कठिण तयाविण गत्यंतर नाही
दीर्घकाळ लागते करावे चालत ना घा
उठा चला धैर्याने मिळवू निश्चित विजयाला ॥४॥
Nirbhayatene Chalat Rahu (Marathi)
Nirbhayatene Chalat Rahu (Marathi)

Post a comment

0 Comments